देवी गायत्री, देवी सरस्वती का ही एक स्वरूप हैं तथा वह भगवान ब्रह्मा की धर्मपत्नी हैं। देवी गायत्री को समस्त वेदों की माता, अर्थात् वेद माता के रूप में पूजा जाता है। देवी गायत्री को हिन्दु त्रिमूर्ति, अर्थात भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु एवं भगवान महेश की देवी के रूप में भी पूजा जाता है। वह देवी लक्ष्मी, देवी पार्वती एवं देवी सरस्वती के रूप में विराजमान हैं।
गायत्री मन्त्र, वेद माता को समर्पित एक सर्वाधिक प्रचलित वैदिक मन्त्र है।
देवी गायत्री भगवान ब्रह्मा की अर्धांगिनी हैं। वैदिक धर्म ग्रन्थों में वर्णित विभिन्न कथाओं के अनुसार, भगवान ब्रह्मा अपनी धर्मपत्नी देवी सरस्वती के साथ एक यज्ञ करना चाहते थे। वह यज्ञ बिना धर्मपत्नी की उपस्थिति के सम्भव नहीं था, किन्तु देवी सरस्वती उपस्थित नहीं थीं।
भगवान ब्रह्मा ने देवी सरस्वती की अनुपस्थिति में पुरोहित जी से एक ऐसी स्त्री की खोज करने को कहा, जिसके साथ वह यज्ञ सम्पन्न करने हेतु विवाह कर सकें। भगवान ब्रह्मा के अनुरोध पर पुरोहित जी ने गायत्री नामक एक योग्य स्त्री का विवाह उनके साथ करा दिया। मान्यतानुसार वह स्त्री साक्षात् देवी सरस्वती का अवतार थीं।
सामान्यतः देवी गायत्री को पञ्चमुखी स्वरूप में दर्शाया जाता है। वह कमलपुष्प पर विराजमान हैं। देवी गायत्री के पाँच मुख, पाँच प्रकार के प्राण, अर्थात प्राण, अपान, व्यान, उदान तथा समान को प्रदर्शित करते हैं। यह पाँच मुख ब्रह्माण्ड के पञ्चतत्व अग्नि, वायु, जल, आकाश तथा पृथ्वी को भी प्रदर्शित करते हैं।
देवी गायत्री की दश भुजायें हैं। वह भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु तथा भगवान शिव के अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं। सामान्यतः देवी गायत्री को शंख, चक्र, कमलपुष्प, अंकुश तथा पाश (फन्दा) लिये हुये दर्शाया जाता है। देवी गायत्री के दो हाथों को अभय मुद्रा तथा वरद मुद्रा में दर्शाया जाता है। देवी गायत्री के मस्तक पर भी भगवान शिव के समान त्रिनेत्र (तीसरा दिव्य नेत्र) विद्यमान है।
गायत्री मन्त्र हिन्दु धर्म ग्रन्थों में वर्णित सर्वाधिक शक्तिशाली मन्त्रों में से एक है। इसका अर्थ है, "है प्रभु ! हमारे अन्तःकरण को प्रकाशित कर हमें धर्म के मार्ग पर अग्रसर करें"।
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
गायत्री मन्त्र समस्त वैदिक मन्त्रों में अत्यधिक शक्तिशाली है। गायत्री मन्त्र पर आधारित 24 अन्य महत्वपूर्ण मन्त्र हैं तथा प्रत्येक मन्त्र एक निश्चित वैदिक देवीय शक्ति को समर्पित है।
अन्य गायत्री मन्त्र