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विभिन्न धर्मग्रन्थों से संगृहीत होली पूजा विधि

DeepakDeepak

होली पूजा विधि

होली पूजा विधि

ऐसा माना जाता है कि, होली पर होलिका पूजन करने से सभी प्रकार के भय पर विजय प्राप्त की जा सकती है। होलिका पूजा से शक्ति, समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है। मान्यताओं के अनुसार, होलिका का निर्माण सभी प्रकार के भय का निवारण करने हेतु किया गया था। इसीलिये होलिका के एक राक्षसी होते हुये भी, होलिका दहन से पूर्व प्रह्लाद के साथ उनका पूजन किया जाता है।

धार्मिक ग्रन्थों में होलिका दहन से पूर्व होलिका पूजन करने का सुझाव दिया गया है। होलिका दहन हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार विचार-विमर्श करके उचित मुहूर्त में ही करना चाहिये। उचित समय पर होलिका दहन करना अत्यन्त आवश्यक है, क्योंकि अशुभ मुहूर्त में होलिका दहन करने से दुर्भाग्य एवं कष्ट भोगना पड़ सकता है। अपने शहर के लिये होलिका दहन का उचित समय ज्ञात करने हेतु कृपया होलिका दहन मुहूर्त पर जायें।

पूजा सामग्री

पूजन हेतु निम्नलिखित सामग्री का उपयोग किया जाना चाहिये - एक कटोरा पानी, गाय के गोबर से बने मोती, रोली, चावल जो टूटे हुये न हों (संस्कृत में अक्षत भी कहा जाता है), धूप एवं गन्ध, पुष्प, कच्चे सूती धागे, हल्दी के टुकड़े, साबुत मूँग की दाल, बताशा, गुलाल तथा नारियल। इसके अतिरिक्त, गेहूँ एवं चना की नवीन फसलों में से पूर्ण विकसित अनाज को भी पूजा सामग्री में सम्मिलित किया जा सकता है।

होलिका स्थापना

जिस स्थान पर होलिका रखी जाती है, उसे गाय के गोबर से लीपकर और गङ्गाजल से धोकर पवित्र किया जाता है। केन्द्र में एक लकड़ी का खम्बा रखा जाता है तथा उसके चारों ओर गाय के गोबर से बने खिलौनों, मोतियों तथा मालाओं से ढेर बनाया जाता है, जिन्हें लोकप्रिय रूप से गुलरी, भरभोलिये अथवा बड़कुला के नाम से जाना जाता है। सामान्यतः गाय के गोबर से बनी होलिका एवं प्रह्लाद की मूर्तियाँ उस ढेर के शीर्ष पर रखी जाती हैं। होलिका के ढेर को गाय के गोबर से निर्मित ढालों, तलवारों, सितारों, सूर्य, चन्द्र, आदि खिलौनों से सुसज्जित किया जाता है।

होलिका दहन के समय भक्त प्रह्लाद की मूर्ति को बाहर निकाला जाता है। इसके अतिरिक्त होलिका दहन से पूर्व गाय के गोबर की चार गुलरियाँ भी सुरक्षित रख ली जाती हैं। एक पितरों के नाम पर, दूसरी हनुमान जी, के नाम पर, तीसरी देवी शीतला के नाम पर तथा चौथी गुलरी को परिवार के नाम पर सुरक्षित जाता है।

Holika Puja and Dahan
पूजा के पश्चात् होलिका दहन होते हुये

पूजा विधि

हमने संस्कृत में मन्त्रों को सूचिबद्ध किया है तथा उनके साथ ही हमने उन मन्त्रों का अर्थ भी समझाया है। यदि कोई उन मन्त्रों का जाप करने में सक्षम नहीं है तो वह अपनी भाषा में उसी भाव से उनका जाप कर सकता है।

1. सभी पूजा सामग्री को एक थाल में रख लें। पूजा की थाली के समीप छोटे पात्र में जल भी रखें। पूजा स्थल पर पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। तत्पश्चात् तीन बार निम्लिखित मन्त्र का जाप करते हुये पूजा की थाली एवं अपने ऊपर जल छिड़कें।

होली पवित्रीकरण मन्त्र

ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु। x 3

उपरोक्त मन्त्र का उच्चारण किसी भी शुभ कार्य को आरम्भ करने से पूर्व भगवान विष्णु का ध्यान करने एवं उनका आशीर्वाद ग्रहण करने हेतु किया जाता है। इसका प्रयोग पूजा स्थल का शुद्धिकरण करने हेतु भी किया जाता है।

2.अब दाहिने हाथ में जल, अक्षत, पुष्प एवं दक्षिणा के रूप में कुछ पैसे लेकर सङ्कल्प ग्रहण करें।

होली सङ्कल्प मन्त्र

ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य अद्यैतस्य ब्रह्मणोऽह्नि
द्वितीयप्रहरार्द्धे श्वेतवराहकल्पे जम्बूद्वीपे भरतखण्डे अमुक-प्रदेशे (अपने प्रदेश का नाम लें)
अमुक-पुण्यक्षेत्रे (क्षेत्र का नाम लें) कलियुगे कलिप्रथमचरणे अमुक-संवत्सरे (संवत्सर का नाम लें)
फाल्गुन-मासे शुभे शुक्लपक्षे पूर्णिमायां शुभतिथौ अमुक-वासरे (दिन का नाम लें)
अमुक-गोत्रोत्पन्नः (अपने गौत्र का नाम लें) अहं (अपने नाम का उच्चारण करें)
मम इह जन्मनि जन्मान्तरे वा सर्वपापक्षयपूर्वक-दीर्घायुविपुलधनधान्यसमृद्ध्यर्थं
मम दैहिक-दैविक-भौतिक-त्रिविध-ताप-निवृत्यर्थं सदभीष्टसिद्धयर्थं च
प्रह्लादनृसिंहहोलीत्यादीनां पूजनमहं करिष्ये।

उपरोक्त मन्त्र का जप करके, व्यक्ति वर्तमान में प्रचलित हिन्दु तिथि, पूजा का स्थान, अपने परिवार का उपनाम, अपना नाम, पूजा का उद्देश्य तथा पूजा किसके निमित्त की जाती है, का पाठ कर रहा है, ताकि पूजा का सम्पूर्ण लाभ उपासक को प्राप्त हो जाये।

3. अब दाहिने हाथ में पुष्प एवं अक्षत लेकर भगवान गणेश का ध्यान एवं स्मरण करें। भगवान गणेश का ध्यान करते समय निम्नलिखित मन्त्र का जाप करें -

होली गणेश ध्यान मन्त्र

गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥

ॐ गं गणपतये नमः पञ्चोपचारार्थे गन्धाक्षतपुष्पाणि समर्पयामि।

उपरोक्त मन्त्र का जाप उच्चारण करते हुये एक पुष्प पर रोली एवं अक्षत लगाकर सुगन्ध सहित भगवान गणेश को अर्पित करें।

4. भगवान गणेश की पूजा करने के पश्चात् देवी अम्बिका का स्मरण करें तथा निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करें। नीचे दिये गये मन्त्र का जप करते हुये पुष्प पर रोली तथा अक्षत लगाकर सुगन्ध सहित देवी अम्बिका को अर्पित करें।

होली अम्बिका ध्यान मन्त्र

ॐ सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

ॐ अम्बिकायै नमः पञ्चोपचारार्थे गन्धाक्षतपुष्पाणि समर्पयामि।

5. तदुपरान्त निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये भगवान नृसिंह का ध्यान करें। नीचे दिये गये मन्त्र का उच्चारण करते हुये पुष्प पर रोली तथा अक्षत लगाकर सुगन्ध सहित भगवान नृसिंह को अर्पित करें।

होली नृसिंह ध्यान मन्त्र

ॐ सत्यं ज्ञानसुखस्वरूपममलं क्षीराब्धिमध्येस्थितम्
योगारूढमतिप्रसन्नवदनं भूषासहस्रोज्वलम्।
तीक्ष्णं चक्रपिनाकशायकवरान् विभ्राणमर्कच्छवि।
छत्रं भूतफणीन्द्रमिन्दुधवलं लक्ष्मीनृसिंहं भजे॥

ॐ नृसिंहाय नमः पञ्चोपचारार्थे गन्धाक्षतपुष्पाणि समर्पयामि।

6. नृसिंह भगवान का पूजन करने के पश्चात् भक्त प्रह्लाद का स्मरण करें तथा निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करें। नीचे दिये गये मन्त्र का उच्चारण करते हुये पुष्प पर रोली एवं अक्षत लगाकर सुगन्ध सहित भक्त प्रह्लाद को अर्पित करें।

होली प्रह्लाद ध्यान मन्त्र

ब्रह्मादयः सुरगणा मुनयोऽथ सिद्धाः सत्त्वैकतानगतयो वचसां प्रवाहैः।
नाराधितुं पुरुगुणैरधुनापि पिप्रुः किं तोष्टुमर्हति स मे हरिरुग्रजातेः॥

ॐ प्रह्लादाय नमः पञ्चोपचारार्थे गन्धाक्षतपुष्पाणि समर्पयामि।

7. अब होलिका के सामने हाथ जोड़कर खड़े हो जायें तथा निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु प्रार्थना करें।

होली प्रार्थना मन्त्र

असृक्पाभयसंत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिशैः।
अतस्त्वां पूजयिष्यामि भूते भूतिप्रदा भव॥

इसका अर्थ यह है कि, कुछ मूर्ख एवं बचकाने लोगों ने रक्तपान करने वाले राक्षसों के निरन्तर भय के कारण होलिका का निर्माण किया था। अतः, मैं आपकी पूजा करता हूँ तथा अपने लिये शक्ति, धन एवं समृद्धि करता हूँ।

8. होलिका को अक्षत, सुगन्ध, पुष्प, साबुत मूँग की दाल, हल्दी के टुकड़े, नारियल तथा भरभोलिये (गाय के सूखे गोबर से बनी माला जिसे गुलरी तथा बड़कुला भी कहते हैं) अर्पित करें। होलिका की परिक्रमा करते हुये उसके चारों ओर कच्चे सूत की तीन, पाँच अथवा सात माला बाँधी जाती हैं। तत्पश्चात् कलश के जल को होलिका के समक्ष अर्पित कर दें।

9. तदुपरान्त होलिका दहन किया जाता है। सामान्यतः, होलिका दहन हेतु सार्वजनिक होलिका की अग्नि घर लायी जाती है। इसके पश्चात् सभी पुरुष रोली का शुभ टीका लगाते हैं तथा बड़ों से आशीर्वाद लेते हैं। लोग होलिका की परिक्रमा करते हैं तथा नवीन फसल को होली की अग्नि में भूनते हैं। भुने हुये अनाज को होलिका प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।

अगली सुबह, गीली होली के दिन, होली के अलाव की राख एकत्र की जाती है तथा शरीर पर लगायी जाती है। राख को पवित्र माना जाता है तथा माना जाता है कि, इसको के प्रयोग से शरीर एवं आत्मा शुद्ध हो जाती है। ज्योतिषियों द्वारा अलाव की भस्म से अनेक उपाय वर्णित किये गये हैं।

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