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2026 द्वादशी व्रत के दिन लँकेस्टर, California, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिये

DeepakDeepak

2026 द्वादशी के दिन

द्वादशी
25 दिन शेष
वासुदेव द्वादशी
आषाढ़, शुक्ल द्वादशी
लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका
25
जुलाई 2026
शनिवार
2026 द्वादशी उपवास के दिन
[2082 - 2083] विक्रम सम्वत
जनवरी 2026
कृष्ण कूर्म द्वादशी
जनवरी 14, 2026, बुधवार
द्वादशी
कृष्ण द्वादशी
माघ, कृष्ण द्वादशी
प्रारम्भ - 04:22 ए एम, जनवरी 14
समाप्त - 06:46 ए एम, जनवरी 15
भीष्म द्वादशी
जनवरी 29, 2026, बृहस्पतिवार
द्वादशी
शुक्ल द्वादशी
माघ, शुक्ल द्वादशी
प्रारम्भ - 12:25 ए एम, जनवरी 29
समाप्त - 09:39 पी एम, जनवरी 29
फरवरी 2026
कृष्ण भीष्म द्वादशी
फरवरी 13, 2026, शुक्रवार
द्वादशी
कृष्ण द्वादशी
फाल्गुन, कृष्ण द्वादशी
प्रारम्भ - 12:55 ए एम, फरवरी 13
समाप्त - 02:31 ए एम, फरवरी 14
नृसिंह द्वादशी
फरवरी 27, 2026, शुक्रवार
द्वादशी
शुक्ल द्वादशी
फाल्गुन, शुक्ल द्वादशी
प्रारम्भ - 09:02 ए एम, फरवरी 27
समाप्त - 07:13 ए एम, फरवरी 28
मार्च 2026
द्वादशी
कृष्ण द्वादशी
चैत्र, कृष्ण द्वादशी
प्रारम्भ - 08:46 पी एम, मार्च 14
समाप्त - 09:10 पी एम, मार्च 15
वामन द्वादशी
मार्च 29, 2026, रविवार
द्वादशी
शुक्ल द्वादशी
चैत्र, शुक्ल द्वादशी
प्रारम्भ - 07:16 पी एम, मार्च 28
समाप्त - 06:39 पी एम, मार्च 29
अप्रैल 2026
कृष्ण वामन द्वादशी
अप्रैल 13, 2026, सोमवार
द्वादशी
कृष्ण द्वादशी
वैशाख, कृष्ण द्वादशी
प्रारम्भ - 12:38 पी एम, अप्रैल 13
समाप्त - 11:42 ए एम, अप्रैल 14
द्वादशी
शुक्ल द्वादशी
वैशाख, शुक्ल द्वादशी
प्रारम्भ - 05:45 ए एम, अप्रैल 27
समाप्त - 06:21 ए एम, अप्रैल 28
मई 2026
द्वादशी
कृष्ण द्वादशी
ज्येष्ठ, कृष्ण द्वादशी
प्रारम्भ - 12:59 ए एम, मई 13
समाप्त - 10:50 पी एम, मई 13
द्वादशी
शुक्ल द्वादशी
ज्येष्ठ, शुक्ल द्वादशी
प्रारम्भ - 05:51 पी एम, मई 26
समाप्त - 07:26 पी एम, मई 27
जून 2026
द्वादशी
कृष्ण द्वादशी
ज्येष्ठ, कृष्ण द्वादशी
प्रारम्भ - 10:06 ए एम, जून 11
समाप्त - 07:06 ए एम, जून 12
द्वादशी
शुक्ल द्वादशी
ज्येष्ठ, शुक्ल द्वादशी
प्रारम्भ - 07:39 ए एम, जून 25
समाप्त - 09:52 ए एम, जून 26
जुलाई 2026
कृष्ण रामलक्ष्मण द्वादशी
जुलाई 10, 2026, शुक्रवार
द्वादशी
कृष्ण द्वादशी
आषाढ़, कृष्ण द्वादशी
प्रारम्भ - 04:52 पी एम, जुलाई 10
समाप्त - 01:34 पी एम, जुलाई 11
द्वादशी
शुक्ल द्वादशी
आषाढ़, शुक्ल द्वादशी
प्रारम्भ - 11:04 पी एम, जुलाई 24
समाप्त - 01:27 ए एम, जुलाई 26
अगस्त 2026
कृष्ण वासुदेव द्वादशी
अगस्त 9, 2026, रविवार
द्वादशी
कृष्ण द्वादशी
श्रावण, कृष्ण द्वादशी
प्रारम्भ - 10:34 पी एम, अगस्त 08
समाप्त - 07:30 पी एम, अगस्त 09
दामोदर द्वादशी
अगस्त 23, 2026, रविवार
द्वादशी
शुक्ल द्वादशी
श्रावण, शुक्ल द्वादशी
प्रारम्भ - 03:48 पी एम, अगस्त 23
समाप्त - 05:50 पी एम, अगस्त 24
सितम्बर 2026
द्वादशी
कृष्ण द्वादशी
भाद्रपद, कृष्ण द्वादशी
प्रारम्भ - 04:33 ए एम, सितम्बर 07
समाप्त - 02:12 ए एम, सितम्बर 08
द्वादशी
शुक्ल द्वादशी
भाद्रपद, शुक्ल द्वादशी
प्रारम्भ - 09:13 ए एम, सितम्बर 22
समाप्त - 10:20 ए एम, सितम्बर 23
अक्टूबर 2026
कृष्ण कल्कि द्वादशी
अक्टूबर 6, 2026, मंगलवार
द्वादशी
कृष्ण द्वादशी
आश्विन, कृष्ण द्वादशी
प्रारम्भ - 12:04 पी एम, अक्टूबर 06
समाप्त - 10:46 ए एम, अक्टूबर 07
पद्मनाभ द्वादशी
अक्टूबर 22, 2026, बृहस्पतिवार
द्वादशी
शुक्ल द्वादशी
आश्विन, शुक्ल द्वादशी
प्रारम्भ - 02:17 ए एम, अक्टूबर 22
समाप्त - 02:05 ए एम, अक्टूबर 23
नवम्बर 2026
द्वादशी
कृष्ण द्वादशी
कार्तिक, कृष्ण द्वादशी
प्रारम्भ - 09:05 पी एम, नवम्बर 04
समाप्त - 09:00 पी एम, नवम्बर 05
द्वादशी
शुक्ल द्वादशी
कार्तिक, शुक्ल द्वादशी
प्रारम्भ - 05:01 पी एम, नवम्बर 20
समाप्त - 03:26 पी एम, नवम्बर 21
दिसम्बर 2026
कृष्ण योगेश्वर द्वादशी
दिसम्बर 4, 2026, शुक्रवार
द्वादशी
कृष्ण द्वादशी
मार्गशीर्ष, कृष्ण द्वादशी
प्रारम्भ - 10:14 ए एम, दिसम्बर 04
समाप्त - 11:21 ए एम, दिसम्बर 05
मत्स्य द्वादशी
दिसम्बर 20, 2026, रविवार
द्वादशी
शुक्ल द्वादशी
मार्गशीर्ष, शुक्ल द्वादशी
प्रारम्भ - 06:44 ए एम, दिसम्बर 20
समाप्त - 04:06 ए एम, दिसम्बर 21

टिप्पणी: सभी समय १२-घण्टा प्रारूप में लँकेस्टर, संयुक्त राज्य अमेरिका के स्थानीय समय और डी.एस.टी समायोजित (यदि मान्य है) के साथ दर्शाये गए हैं।
आधी रात के बाद के समय जो आगामि दिन के समय को दर्शाते हैं, आगामि दिन से प्रत्यय कर दर्शाये गए हैं। पञ्चाङ्ग में दिन सूर्योदय से शुरू होता है और पूर्व दिन सूर्योदय के साथ ही समाप्त हो जाता है।

2026 द्वादशी उपवास के दिन

Lord Vishnu on Garuda
गरुड़ पर सवार भगवान विष्णु

द्वादशी तिथि हिन्दु पञ्चाङ्ग की एक अत्यन्त शुभ एवं पवित्र तिथि मानी जाती है। यह प्रत्येक पक्ष की बारहवीं तिथि होती है। धर्मग्रन्थों के अनुसार द्वादशी तिथि विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित है। शास्त्रों में इसे व्रत, उपवास एवं दान आदि सत्कर्मों के लिये अत्यन्त फलदायी कहा गया है। द्वादशी का व्रत न केवल पापों से मुक्ति प्रदान करता है, अपितु यह मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने वाला भी माना गया है।

धर्मशास्त्रों के अनुसार द्वादशी तिथि भगवान विष्णु की उपासना के लिये सर्वोत्तम होती है। मनुस्मृति, पद्मपुराण, स्कन्दपुराण तथा विष्णुधर्मोत्तर पुराण में द्वादशी के व्रत का महत्त्व विस्तार से वर्णित किया गया है। द्वादशी तिथि पर किया गया स्नान, दान, जप, हवन तथा उपवास मनुष्य को अक्षय फल प्रदान करता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार द्वादशी के दिन भगवान विष्णु ने भक्तों के कल्याण हेतु विभिन्न अवतार धारण किये। जैसे कूर्म द्वादशी भगवान विष्णु के कूर्म अवतार से, मत्स्य द्वादशी मत्स्य अवतार से, परशुराम द्वादशी परशुराम अवतार आदि से सम्बन्धित है। प्रत्येक द्वादशी का सम्बन्ध भगवान विष्णु के किसी विशेष अवतार, कथा अथवा उत्सव से होता है।

द्वादशी व्रत

इस व्रत में प्रातःकाल स्नान आदि कर भक्तगण भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं, तुलसी पत्र, पञ्चामृत, पुष्प तथा नैवेद्य अर्पित करते हैं विभिन्न मन्त्रों का जाप करते हैं। द्वादशी तिथि को दान करने का विशेष महत्त्व बताया गया है। पद्मपुराण में कहा गया है कि इस दिन सामर्थ्य के अनुसार गोदान, अन्नदान एवं वस्त्रदान करने से मनुष्य को विष्णुलोक की प्राप्ति होती है। इसी प्रकार विष्णुधर्मोत्तर पुराण में उल्लेख है कि द्वादशी के दिन उपवास एवं विष्णु पूजन करने वाला व्यक्ति जन्म-मृत्यु के बन्धन से मुक्त हो जाता है।

आध्यात्मिक दृष्टि से द्वादशी तिथि का व्रत मन एवं शरीर की शुद्धि के लिये भी किया जाता है। यह संयम, श्रद्धा एवं भक्ति का प्रतीक है। द्वादशी के दिन भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में संतुलन, स्थिरता तथा आध्यात्मिक शान्ति का अनुभव होता है।

द्वादशी केवल एक तिथि नहीं, अपितु यह व्रत तथा पूजा की ऐसी परम्परा है जो वैदिक धर्म के अनुयायियों को कर्म, भक्ति तथा ज्ञान का समन्वय सिखाती है। यह व्रत जीवन में सद्भाव, कृतज्ञता एवं ईश्वर में निष्ठा का सन्देश प्रदान करता है। इसीलिये द्वादशी तिथि को हिन्दु पञ्चाङ्ग में सर्वाधिक मङ्गलमयी एवं पुण्यप्रद तिथियों में गिना गया है।

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