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देवी-देवता वार व्रत कथा संग्रह | सप्ताह के सभी दिनों की व्रत कथायें

DeepakDeepak

देवी-देवता सप्तवार व्रत कथा

देवी-देवता सप्तवार व्रत कथा

देवी-देवता वार व्रत कथा संग्रह

  1. भैरव रविवार व्रत कथा - भगवान विष्णु एवं ब्रह्मा जी के मध्य श्रेष्ठता को लेकर हुये विवाद की कथा वर्णित की गयी है। इस विवाद का समाधान करने हेतु ही भगवान कालभैरव का प्राकट्य हुआ था।
  2. शिव सोमवार व्रत कथा - माता पार्वती के अनुरोध पर भगवान शिव का निःसन्तान धनिक को पुत्र प्रदान करना तथा उस व्रत के प्रभाव से उस अल्पायु पुत्र के दीर्घायु होने की कथा का वर्णन किया गया है।
  3. हनुमान मङ्गलवार व्रत कथा - यह कथा एक ऐसे ब्राह्मण दम्पति पर आधारित है जिनके कोई सन्तान नहीं थी। किस प्रकार हनुमान जी की कृपा से उनको पुत्र प्राप्ति होती है यह ज्ञात करने हेतु सम्पूर्ण कथा पढ़ें।
  4. मुरुगन मङ्गलवार व्रत कथा - भगवान मुरुगन की कृपा दृष्टि के कारण निर्धन ब्राह्मण के धनाढ्य बनने की कथा प्रदान की गयी है। इस कथा का पाठ एवं श्रवण दक्षिण भारत में प्रचलित मुरुगन मङ्गलवार में किया जाता है।
  5. गणेश बुधवार व्रत कथा - यह गणेश बुधवार व्रत के दिन पढ़ी एवं सुनी जाने वाली एक अत्यन्त प्रचलित कथा है, जिसमें एक बहन प्रतिदिन अपने भाई का मुख देखने के पश्चात् ही भोजन करती थी। एक दिन उसके भाई से गणेश जी का अपमान हो जाता है जिसके कारण उसके प्राण संकट में आ जाते हैं।
  6. विष्णु बृहस्पतिवार व्रत कथा - एक दानी राजा एवं उसकी कंजूस रानी की कथा प्रदान की है। रानी को राजा का दान-पुण्य करना अच्छा नहीं लगता था जिसके कारण वह एक साधु महाराज से अपने धन के नाश का उपाय पूछती है।
  7. सन्तोषी माता शुक्रवार व्रत कथा - एक वृद्धा एवं उसके सात पुत्रों की कथा वर्णित की गयी है। वृद्धा अपने छः पुत्रों को स्वादिष्ट पकवान तथा सातवें पुत्र को केवल शेष बची जूठन देती थी। इस कारण वह घर त्यागकर अन्य नगर में जाता है और सन्तोषी माता की कृपा से उन्नति करता है।
  8. वैभव लक्ष्मी शुक्रवार व्रत कथा - यह शीला एवं उसके पति की कथा है। शीला का पति कुसंगति में फँसने एवं शीघ्र धनवान बनने के लोभ में समस्त जमा-पूँजी नष्ट कर देता है। शीला द्वारा माता वैभव लक्ष्मी का व्रत करने से उसके पति की मति सुधरती है।
  9. माँ काली शनिवार व्रत कथा - निर्धन प्राध्यापक एवं उसकी पुत्री कथा वर्णित की गयी है। धन के अभाव में पुत्री का विवाह में बाधा आ रही थी, जिसका निवारण माँ काली की कृपा से हो जाता है। इस कथा का पाठ एवं श्रवण माँ काली शनिवार व्रत में किया जाता है।
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द्रिक पञ्चाङ्ग और पण्डितजी लोगो drikpanchang.com के पञ्जीकृत ट्रेडमार्क हैं।
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