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दीवाली पूजा विधि | विस्तृत दीपावली पूजन विधि

DeepakDeepak

दीवाली पूजा विधि

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विस्तृत दीपावली पूजन विधि

दीवाली के दिन अमावस्या तिथि पर भगवान गणेश एवं देवी लक्ष्मी की नवीन प्रतिमाओं की पूजा की जाती है। लक्ष्मी-गणेश पूजा के अतिरिक्त इस दिन कुबेर पूजा तथा बही-खाता पूजा भी की जाती है।

दीवाली पूजा के दिन एक दिवसीय उपवास का पालन किया जाना चाहिये। स्वयं की क्षमता एवं इच्छा-शक्ति के अनुरूप आप इस दिन निर्जल (बिना जल पिये) या फलाहार (मात्र फल ग्रहण करके) या दूध मात्र से उपवास कर सकते हैं।

Lakshmi Ganesha Saraswati Puja
दीवाली के समय लक्ष्मी गणेश सरस्वती पूजा

दीवाली पूजा उचित दीवाली पूजा मुहूर्त में ही की जानी चाहिये। दीवाली पूजा मुहूर्त निर्धारित करनें में स्थिर लग्न, प्रदोषकाल एवं अमावस्या तिथि पर विचार किया जाता है। सम्पूर्ण दीवाली पूजा में निम्नलिखित पूजा सम्म्लित होती हैं।

  1. आत्म-शोधन - आन्तरिक एवं बाह्य आत्म शुद्धि
  2. सङ्कल्प - सम्पूर्ण विधि-विधान से दीवाली पूजा के अनुष्ठान सम्पन्न करने का पवित्र सङ्कल्प ग्रहण किया जाता है।
  3. शान्ति-पाठ - समस्त प्राणियों के जीवन में सुखः, शान्ति व समृद्धि हेतु शान्ति पाठ किया जाता है।
  4. मङ्गल-पाठ - समस्त प्राणियों की मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु मङ्गल पाठ किया जाता है।
  5. कलश-स्थापना - कलश स्थापना की विस्तृत पूजा विधि
  6. गणपति पूजा - संक्षिप्त पञ्च-चरणीय गणेश पूजन विधि
  7. नव-ग्रह पूजा - संक्षिप्त नव-ग्रह पूजन
  8. षोडश मातृका-पूजा - संक्षिप्त षोडश मातृका पूजन
  9. भगवान गणेश की नवीन मूर्ति की पूजा - भगवान गणेश की षोडशोपचार पूजा
  10. श्रीलक्ष्मी की नवीन मूर्ति की पूजा - देवी लक्ष्मी की षोडशोपचार पूजा
  11. महा-काली पूजा - लेखनी-दावात पर महा-काली पूजा
  12. सरस्वती पूजा - बही-खाते पर सरस्वती पूजा
  13. कुबेर पूजा तिजोरी-बक्से पर श्रीकुबेर पूजा
  14. दीप-मालिका पूजा - दीप-मालिका पूजा विधि के समस्त आवश्यक चरण
  15. विसर्जन - प्रार्थना द्वारा औपचारिक रूप से दीवाली पूजा सम्पन्न करना

उपरोक्त पूजा सम्पूर्ण विधि-विधान से की जाती है। सम्पूर्ण दीवाली पूजा सम्पन्न करने में कुछ घण्टों का समय लग सकता है। यह सम्भव है कि लक्ष्मी पूजा मुहूर्त अल्प समय के लिये ही उपलब्ध हो और उसमें सम्पूर्ण दीवाली पूजा सम्पन्न न की जा सके। अतः दीवाली पूजा, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त से पूर्व ही आरम्भ की जा सकती है, जिससे लक्ष्मी पूजा का समय उपलब्ध मुहूर्त के साथ संयोजित हो सके। शेष पूजा, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त के समाप्त होने के पश्चात् भी की जा सकती है।

यह स्मरण रहे कि दीवाली पूजा में प्रज्वलित किया गया दीप रात्रि पर्यन्त निर्विघ्न प्रज्वलित रहना चाहिये। पूजनोपरान्त श्री सूक्त, लक्ष्मी सूक्त तथा देवी लक्ष्मी की अन्य स्तुतियों का पाठ करना चाहिये। यदि सम्भव हो तो देवी लक्ष्मी की स्तुति हेतु जागरण करना चाहिये।

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द्रिक पञ्चाङ्ग और पण्डितजी लोगो drikpanchang.com के पञ्जीकृत ट्रेडमार्क हैं।
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